दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ ने किया होता यह काम तो नहीं होता महाà¤à¤¾à¤°à¤¤
इंसान के जीवन में कई बार à¤à¤¸à¤¾ वकà¥à¤¤ à¤à¥€ आता है जब वह अपने आप को असहाय पाता है। वह अपने आप को चारों तरफ से मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ से घिरा हà¥à¤† रहता है और इन तकलीफों से निकलने का उसको कोई रासà¥à¤¤à¤¾ दिखाई नहीं देता है। à¤à¤¸à¥‡ मà¥à¤¶à¥à¤•िल समय में आपका जà¥à¤žà¤¾à¤¨, विवेक और आपके मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• आपको मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ के बियाबान से निकालकर सही मारà¥à¤— पर चलने का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ करते है।
कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ कथाओं, गौरवगाथाओं, पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और वैदिक आखà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ से हमारी परंपरा, संसà¥à¤•ृति और इतिहास à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† है। इन पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• कथाओं को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ कर हम अपने जीवन को सहज, सरल और सही राह का हमराही बना सकते हैं।
अकà¥à¤¸à¤° यह देखा जाता है कि हम बड़ों का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तो करते हैं, लेकिन समà¥à¤®à¤¾à¤¨ की परंपरा का पालन रोजाना और दिल से नहीं करते हैं। आज की कहानी से हम यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि बड़ों का हम हमेशा समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करें तो जीवन की बड़ी से बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान बड़ी सरलता से हो सकता है।
बात उस दौर की है जब महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का यà¥à¤¦à¥à¤§ अपने चरम पर था। पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® के तीरों का निशाना पांडवों की ओर नहीं था। इससे कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होकर दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ ने à¤à¤• à¤à¥€ पांडव का वध नहीं होने से पितामह पर वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ कस दिया। इससे आहत होकर पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने घोषणा कर दी कि मैं कल पांडवों का वध कर दूंगा। पितामह की घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में à¤à¤¯ और बैचैनी बढ़ गई।
शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¥€à¤·à¥à¤® की सैनà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं से बखूबी वाकिफ थे, इसलिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दौपदी से कहा, 'अà¤à¥€ मेरे साथ चलो' और शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को लेकर à¤à¥€à¤·à¥à¤® पितामह के शिविर में गà¤à¥¤ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ शिविर के बाहर खड़े हो गठऔर दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा, 'अंदर जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करो।'
पांचाली ने शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के कहे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¥€à¤·à¥à¤® को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ होने का वरदान दिया और पांचाली से पूछा, 'पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इतनी रात को तà¥à¤® यहां पर कैसे आई, कà¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤®à¤•ो शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ यहां पर लेकर आठहैं?'
तब पांचाली ने इसका उतà¥à¤¤à¤° हां में देते हà¥à¤ कहा कि शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ बाहर खड़े हैं। यह सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही à¤à¥€à¤·à¥à¤® शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के पास गठऔर दोनों ने à¤à¤•-दूसरे को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया। à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने कहा, 'मेरे à¤à¤• वचन को दूसरे वचन से काटने का काम केवल देवकीनंदन ही कर सकते हैं।'
शिविर में वापस आकर शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा कि तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤• बार जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करने से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पतियों को जीवनदान मिल गया, यदि तà¥à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¥€à¤·à¥à¤®, धृतराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, दà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ जैसे वरिषà¥à¤ जनों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होती और दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨, दà¥à¤ƒà¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ और दूसरे गांधारी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ पांडवों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होंती, तो निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रà¥à¤ª से कà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रण को सजाने की नौबत नहीं आती।
महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के इस पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग से यही सीख मिलती है कि बडे-बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के अनà¥à¤à¤µ को उनके सानिधà¥à¤¯ से ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जाता है। उनको समà¥à¤®à¤¾à¤¨ देने से आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ सलाह और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का खजाना मिलता है, जिससे हम अपना जीवन बेहतर तरीके से संवार सकते है।
इंसान के जीवन में कई बार à¤à¤¸à¤¾ वकà¥à¤¤ à¤à¥€ आता है जब वह अपने आप को असहाय पाता है। वह अपने आप को चारों तरफ से मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ से घिरा हà¥à¤† रहता है और इन तकलीफों से निकलने का उसको कोई रासà¥à¤¤à¤¾ दिखाई नहीं देता है। à¤à¤¸à¥‡ मà¥à¤¶à¥à¤•िल समय में आपका जà¥à¤žà¤¾à¤¨, विवेक और आपके मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• आपको मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ के बियाबान से निकालकर सही मारà¥à¤— पर चलने का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ करते है।
कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ कथाओं, गौरवगाथाओं, पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और वैदिक आखà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ से हमारी परंपरा, संसà¥à¤•ृति और इतिहास à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† है। इन पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• कथाओं को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ कर हम अपने जीवन को सहज, सरल और सही राह का हमराही बना सकते हैं।
अकà¥à¤¸à¤° यह देखा जाता है कि हम बड़ों का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तो करते हैं, लेकिन समà¥à¤®à¤¾à¤¨ की परंपरा का पालन रोजाना और दिल से नहीं करते हैं। आज की कहानी से हम यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि बड़ों का हम हमेशा समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करें तो जीवन की बड़ी से बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान बड़ी सरलता से हो सकता है।
बात उस दौर की है जब महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का यà¥à¤¦à¥à¤§ अपने चरम पर था। पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® के तीरों का निशाना पांडवों की ओर नहीं था। इससे कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होकर दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ ने à¤à¤• à¤à¥€ पांडव का वध नहीं होने से पितामह पर वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ कस दिया। इससे आहत होकर पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने घोषणा कर दी कि मैं कल पांडवों का वध कर दूंगा। पितामह की घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में à¤à¤¯ और बैचैनी बढ़ गई।
शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¥€à¤·à¥à¤® की सैनà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं से बखूबी वाकिफ थे, इसलिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दौपदी से कहा, 'अà¤à¥€ मेरे साथ चलो' और शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को लेकर à¤à¥€à¤·à¥à¤® पितामह के शिविर में गà¤à¥¤ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ शिविर के बाहर खड़े हो गठऔर दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा, 'अंदर जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करो।'
पांचाली ने शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के कहे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¥€à¤·à¥à¤® को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ होने का वरदान दिया और पांचाली से पूछा, 'पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इतनी रात को तà¥à¤® यहां पर कैसे आई, कà¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤®à¤•ो शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ यहां पर लेकर आठहैं?'
तब पांचाली ने इसका उतà¥à¤¤à¤° हां में देते हà¥à¤ कहा कि शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ बाहर खड़े हैं। यह सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही à¤à¥€à¤·à¥à¤® शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के पास गठऔर दोनों ने à¤à¤•-दूसरे को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया। à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने कहा, 'मेरे à¤à¤• वचन को दूसरे वचन से काटने का काम केवल देवकीनंदन ही कर सकते हैं।'
शिविर में वापस आकर शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा कि तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤• बार जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करने से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पतियों को जीवनदान मिल गया, यदि तà¥à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¥€à¤·à¥à¤®, धृतराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, दà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ जैसे वरिषà¥à¤ जनों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होती और दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨, दà¥à¤ƒà¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ और दूसरे गांधारी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ पांडवों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होंती, तो निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रà¥à¤ª से कà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रण को सजाने की नौबत नहीं आती।
महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के इस पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग से यही सीख मिलती है कि बडे-बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के अनà¥à¤à¤µ को उनके सानिधà¥à¤¯ से ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जाता है। उनको समà¥à¤®à¤¾à¤¨ देने से आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ सलाह और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का खजाना मिलता है, जिससे हम अपना जीवन बेहतर तरीके से संवार सकते है।
इंसान के जीवन में कई बार à¤à¤¸à¤¾ वकà¥à¤¤ à¤à¥€ आता है जब वह अपने आप को असहाय पाता है। वह अपने आप को चारों तरफ से मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ से घिरा हà¥à¤† रहता है और इन तकलीफों से निकलने का उसको कोई रासà¥à¤¤à¤¾ दिखाई नहीं देता है। à¤à¤¸à¥‡ मà¥à¤¶à¥à¤•िल समय में आपका जà¥à¤žà¤¾à¤¨, विवेक और आपके मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤• आपको मà¥à¤¸à¥€à¤¬à¤¤à¥‹à¤‚ के बियाबान से निकालकर सही मारà¥à¤— पर चलने का मारà¥à¤—दरà¥à¤¶à¤¨ करते है।
कà¥à¤› à¤à¤¸à¥€ कथाओं, गौरवगाथाओं, पà¥à¤°à¤¾à¤£à¥‹à¤•à¥à¤¤ सà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और वैदिक आखà¥à¤¯à¤¾à¤¨à¥‹à¤‚ से हमारी परंपरा, संसà¥à¤•ृति और इतिहास à¤à¤°à¤¾ हà¥à¤† है। इन पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤• कथाओं को आतà¥à¤®à¤¸à¤¾à¤¤ कर हम अपने जीवन को सहज, सरल और सही राह का हमराही बना सकते हैं।
अकà¥à¤¸à¤° यह देखा जाता है कि हम बड़ों का समà¥à¤®à¤¾à¤¨ तो करते हैं, लेकिन समà¥à¤®à¤¾à¤¨ की परंपरा का पालन रोजाना और दिल से नहीं करते हैं। आज की कहानी से हम यही संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि यदि बड़ों का हम हमेशा समà¥à¤®à¤¾à¤¨ करें तो जीवन की बड़ी से बड़ी समसà¥à¤¯à¤¾ का समाधान बड़ी सरलता से हो सकता है।
बात उस दौर की है जब महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ का यà¥à¤¦à¥à¤§ अपने चरम पर था। पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® के तीरों का निशाना पांडवों की ओर नहीं था। इससे कà¥à¤°à¥‹à¤§à¤¿à¤¤ होकर दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨ ने à¤à¤• à¤à¥€ पांडव का वध नहीं होने से पितामह पर वà¥à¤¯à¤‚गà¥à¤¯ कस दिया। इससे आहत होकर पितामह à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने घोषणा कर दी कि मैं कल पांडवों का वध कर दूंगा। पितामह की घोषणा का पता चलते ही पांडवों के शिविर में à¤à¤¯ और बैचैनी बढ़ गई।
शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ à¤à¥€à¤·à¥à¤® की सैनà¥à¤¯ कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾à¤“ं से बखूबी वाकिफ थे, इसलिठउनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दौपदी से कहा, 'अà¤à¥€ मेरे साथ चलो' और शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को लेकर à¤à¥€à¤·à¥à¤® पितामह के शिविर में गà¤à¥¤ शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ शिविर के बाहर खड़े हो गठऔर दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा, 'अंदर जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करो।'
पांचाली ने शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के कहे अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¥€à¤·à¥à¤® को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤¨à¥‡ दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ को अखंड सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤µà¤¤à¥€ होने का वरदान दिया और पांचाली से पूछा, 'पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ इतनी रात को तà¥à¤® यहां पर कैसे आई, कà¥à¤¯à¤¾ तà¥à¤®à¤•ो शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ यहां पर लेकर आठहैं?'
तब पांचाली ने इसका उतà¥à¤¤à¤° हां में देते हà¥à¤ कहा कि शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ बाहर खड़े हैं। यह सà¥à¤¨à¤¤à¥‡ ही à¤à¥€à¤·à¥à¤® शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ के पास गठऔर दोनों ने à¤à¤•-दूसरे को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® किया। à¤à¥€à¤·à¥à¤® ने कहा, 'मेरे à¤à¤• वचन को दूसरे वचन से काटने का काम केवल देवकीनंदन ही कर सकते हैं।'
शिविर में वापस आकर शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ ने दà¥à¤°à¥Œà¤ªà¤¦à¥€ से कहा कि तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ à¤à¤• बार जाकर पितामह को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करने से तà¥à¤®à¥à¤¹à¤¾à¤°à¥‡ पतियों को जीवनदान मिल गया, यदि तà¥à¤® पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¦à¤¿à¤¨ à¤à¥€à¤·à¥à¤®, धृतराषà¥à¤Ÿà¥à¤°, दà¥à¤°à¥‹à¤£à¤¾à¤šà¤¾à¤°à¥à¤¯ जैसे वरिषà¥à¤ जनों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होती और दà¥à¤°à¥à¤¯à¥‹à¤§à¤¨, दà¥à¤ƒà¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ और दूसरे गांधारी पà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ की पतà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ à¤à¥€ पांडवों को पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤® करती होंती, तो निशà¥à¤šà¤¿à¤¤ रà¥à¤ª से कà¥à¤°à¥à¤•à¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में रण को सजाने की नौबत नहीं आती।
महाà¤à¤¾à¤°à¤¤ के इस पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग से यही सीख मिलती है कि बडे-बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों के अनà¥à¤à¤µ को उनके सानिधà¥à¤¯ से ही पà¥à¤°à¤¾à¤ªà¥à¤¤ किया जाता है। उनको समà¥à¤®à¤¾à¤¨ देने से आशीरà¥à¤µà¤¾à¤¦ के साथ सलाह और जà¥à¤žà¤¾à¤¨ का खजाना मिलता है, जिससे हम अपना जीवन बेहतर तरीके से संवार सकते है।