Homeवायरल न्यूज़,slider news,
जानें शीतला अष्टमी का महत्व और शुभ मुहूर्त

 à¤šà¥ˆà¤¤à¥à¤° माह की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को शीतला अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। इस बार यह त्योहार 9 मार्च 2018 को पड़ रहा है। इस पर्व में बासी भोजन किया जाता है, इसीलिए इसे बसोड़ा या बसौड़ा के नाम से भी जाना जाता है।

शीतला माता की पूजा के दिन यानी शीतला अष्टमी को चूल्हा नहीं जलाने की परंपरा है। इसीलिए शीतला अष्टमी से एक दिन पहले ही खाना बनाकर रख लिया जाता है। सर्वप्रथम स्कन्दपुराण में शीतला मां के बारे में जानकारी मिलती है।

साफ सफाई के महत्व को दर्शाने के लिए शीतला माता के हाथ में कलश, सूप, झाड़ू और नीम के पत्ते हैं। इनका स्वरूप अत्यंत शीतल है और रोगों को हरने वाला है। इसीलिए इनकी पूजा के बारे में कहा जाता है कि यह निरोगी रहने का वरदान देने वाली हैं।

इस दिन के बाद नहीं खाएं बासी खाना

शीतला अष्टमी के दिन बासी खाने का भोग लगाने और खाने का विधान है। दरअसल, आखिरी बार आप इसी दिन बासी भोजन खा सकते हैं, इसके बाद से बासी भोजन का प्रयोग बिलकुल बंद कर देना चाहिए। कारण, गर्मी की शुरुआत के साथ ही यदि आप बासी भोजन करते रहेंगे, तो बीमारियां और फूड प्वाइजनिंग का खतरा हो सकता है।

यह त्योहार गर्मी की शुरुआत में पड़ता है। गर्मी के दिनों किन चीजों का इस्तेमाल करना है, किन चीजों से बचाव करना है, इसकी जानकारी समाज में फैलाने के लिए यह त्योहार मनाया जाता था। माता के हाथ में नीम की पत्तियां यह संदेश देती हैं कि गर्मी में साफ-सफाई, शीतल जल और एंटीबायोटिक गुणों से युक्त नीम का प्रयोग करना चाहिए।

शुभ मुहूर्त

शीतला अष्टमी पूजा का शुभ मुहुर्त सुबह 6.41 मिनट से शाम 6.21 मिनट तक है। मान्यता है यदि किसी को चेचक निकल आती है, तो घर में साफ-सफाई का विशेष ध्यान दिया जाता है। नियम के अनुसार माता भगवती की पूजा होती है। बताया जाता है कि जिस घर में चेचक से कोई बीमार हो, उसे ये पूजा नहीं करनी चाहिए।

Share This News :