देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ की आज करें पूजा
चैतà¥à¤° शà¥à¤•à¥à¤² षषà¥à¤ ी के अंतरà¥à¤—त चैतà¥à¤° नवरातà¥à¤°à¤¿ पर छठी दà¥à¤°à¥à¤—ा कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ का पूजन किया जाà¤à¤—ा। देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ बृहसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ गà¥à¤°à¤¹ पर अपना आधिपतà¥à¤¯ रखती हैं। देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯ के गृहसà¥à¤¥ अधेड़ अवसà¥à¤¥à¤¾ को संबोधित करती हैं। महरà¥à¤·à¤¿ कत के गोतà¥à¤° में उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होने व महरà¥à¤·à¤¿ कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¨ की पà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ होने हेतॠपारà¥à¤µà¤¤à¥€ के इस सà¥à¤µà¤°à¥‚प को कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¨à¥€ कहते हैं। कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¨à¥€ का दिवà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤°à¥‚प सोने के समान चमकीला है। शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° चतà¥à¤°à¥à¤à¥à¤œà¥€ देवी के ऊपरी बाà¤à¤‚ हाथ में कमल, निचले बाà¤à¤‚ हाथ में तलवार, ऊपरी दाà¤à¤‚ हाथ में अà¤à¤¯ मà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ व निचले दाà¤à¤‚ हाथ में वरदमà¥à¤¦à¥à¤°à¤¾ है जोकी à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को वरदान देती है।
शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° सà¥à¤µà¤°à¥à¤£ आà¤à¥‚षणों से सà¥à¤¸à¤œà¥à¤œà¤¿à¤¤ देवी पीले वसà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ में सिंह पर विराजमान हैं। शà¥à¤°à¥€à¤•ृषà¥à¤£ को पतिरूप में पाने हेतॠबà¥à¤°à¤œ की गोपियों ने इनà¥à¤¹à¥€à¤‚ की पूजा कालिनà¥à¤¦à¥€-यमà¥à¤¨à¤¾ के तट पर की थी। ये बà¥à¤°à¤œà¤®à¤‚डल की अधिषà¥à¤ ातà¥à¤°à¥€ देवी हैं। कालपà¥à¤°à¥‚ष सिदà¥à¤§à¤¾à¤‚त के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¥€ के नवम व दà¥à¤µà¤¾à¤¦à¤¶ à¤à¤¾à¤µ पर अपने आधिपतà¥à¤¯ से वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ के धरà¥à¤®, à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯, इषà¥à¤Ÿ, हानि, वà¥à¤¯à¤¯, व मोकà¥à¤· पर अपना सà¥à¤µà¤¾à¤®à¤¿à¤¤à¥à¤µ रखती हैं।
वासà¥à¤¤à¥à¤¶à¤¾à¤¸à¥à¤¤à¥à¤° के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° इनकी दिशा उतà¥à¤¤à¤°à¤ªà¥‚रà¥à¤µ है। इनकी पूजा का सरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ समय है गौधूलि व इनकी पूजा पीले फूलों से करनी चाहिà¤à¥¤ इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ बेसन के हलवे का à¤à¥‹à¤— लगाना चाहिठव शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार में इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ हलà¥à¤¦à¥€ अरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ करना शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ रहता है। देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ की साधना उन लोगों के लिठसरà¥à¤µà¤¶à¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है जिनकी आजीविका का संबंध अधà¥à¤¯à¤¯à¤¨, लेखापाल या कर विà¤à¤¾à¤— से है। इनकी साधना से दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिलता है, विवाह बाधा दूर होती है व शतà¥à¤°à¥à¤¤à¤¾ का अंत होता हैं।
पूजन विधि: घर की पूरà¥à¤µ दिशा में पूरà¥à¤µ मà¥à¤–ी होकर पीले वसà¥à¤¤à¥à¤° पर देवी कातà¥à¤¯à¤¾à¤¯à¤¿à¤¨à¥€ का चितà¥à¤° सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¿à¤¤ कर दशोपचार पूजन करें। सरसों के तेल का दीपक करें, गà¥à¤—ल से धूप करें, सूरजमà¥à¤–ी के फूल चà¥à¤¾à¤à¤‚, केसर से तिलक करें तथा गà¥à¤¡à¤¼ चने का à¤à¥‹à¤— लगाà¤à¤‚ व चंदन की माला से 108 बार इस विशिषà¥à¤Ÿ मंतà¥à¤° को जपें। पूजन के गà¥à¤¡à¤¼-चना गाय को खिला दें।