ओरछा में शà¥à¤°à¥€à¤°à¤¾à¤® के जनà¥à¤®à¥‹à¤¤à¥à¤¸à¤µ की धूम
मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के टीकमगढ़ जिले में पà¥à¤°à¤¸à¤¿à¤¦à¥à¤§ धारà¥à¤®à¤¿à¤• सà¥à¤¥à¤² ओरछा में à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€ राम के 444 वें जनà¥à¤® उतà¥à¤¸à¤µ के साथ तीन दिवसीय कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® पà¥à¤°à¤¾à¤°à¤‚ठहो गया। इस धारà¥à¤®à¤¿à¤• उतà¥à¤¸à¤µ में देश तथा विदेश से बडी संखà¥à¤¯à¤¾ में शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ यहां पहà¥à¤‚च रहे हैं। पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ के à¤à¥€ पà¥à¤£à¥à¤¤à¤¾ इंतेजाम किठगठहैं। इस वरà¥à¤· इस धारà¥à¤®à¤¿à¤• और सांसà¥à¤•ृमिक कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® को जिला पà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ विषेष रूप से à¤à¤µà¥à¤¯à¤¤à¤¾ पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ की जा रही है। 21 मारà¥à¤š को मंदिर से जाते समय सà¥à¤¥à¤¾à¤¨à¥€à¤¯ लोगो ने संघ पà¥à¤°à¤®à¥à¤– मोहन à¤à¤¾à¤—वत की उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में गोà¤à¤•à¥à¤¤ मलूकपीठाधीशà¥à¤µà¤° संत डॉ राजेनà¥à¤¦à¤¦à¤¾à¤¸ से कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® की à¤à¤µà¥à¤¯à¤¤à¤¾ का अनà¥à¤°à¥‹à¤§ किया था। ओरछा का रामराजा मंदिर à¤à¤—वान राम-जानकी की मूल पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤®à¤¾à¤“ं के लिठउतà¥à¤¤à¤° à¤à¤¾à¤°à¤¤ मे विशेष सà¥à¤¥à¤¾à¤¨ रखता है।
इसी कारण यहां पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤°à¥à¤· औसतन पांच लाख से अधिक धरà¥à¤®à¤ªà¤¿à¤ªà¤¾à¤¸à¥ सà¥à¤µà¤¦à¥‡à¤¶à¥€ परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• आते हैं और लगà¤à¤— 20 हजार से अधिक विदेशी परà¥à¤¯à¤Ÿà¤• ओरछा की पà¥à¤°à¤¾à¤¤à¤¾à¤¤à¥à¤µà¤¿à¤• महतà¥à¤µ के खूबसूरत महलों, विशाल किले, शीश महल, जहांगीर महल, रायपà¥à¤°à¤µà¥€à¤£ महल, लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ मंदिर, चतà¥à¤°à¥à¤à¥à¤œ मंदिर, बेतवा नदी के तट पर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ छतरियों और नदी किनारे के जंगल मे घूमने वाले जानवरों की अटखेलियां सहित अनेक à¤à¤¤à¤¿à¤¹à¤¾à¤¸à¤¿à¤• इमारतों को निहारने के लिठपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤µà¤°à¥à¤· आते हैं। ओरछा के रामराजा मंदिर में जड़े शिलालेख के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° à¤à¤—वान शà¥à¤°à¥€ रामराजा सरकार को ओरछा की महारानी गणेश कà¥à¤‚अर चैत शà¥à¤•à¥à¤² नवमीं सोमवार वि.स.संवतॠ1631 अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ सोमवार सनॠ1574 मेें अयोधà¥à¤¯à¤¾ से ओरछा तक पà¥à¤£à¥à¤¯-पà¥à¤£à¥à¤¯ नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° के आठमाह 28 दिनों तक पैदल चलकर लाई थीं और सोलह शà¥à¤°à¥ƒà¤‚गार कर उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपने रानीमहल मे बिराजमान करा दिया था।