देवी धूमावती देंगी जादू-टोने से छà¥à¤Ÿà¤•ारा
शनिवार को वैसाख सपà¥à¤¤à¤®à¥€ तिथि मूल नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° में आई है। आज के योग में देवी जेषà¥à¤ ा अरà¥à¤¥à¤¾à¤¤ धूमावती का पूजन करना शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ रहेगा। पदà¥à¤®à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤£ के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯ की देवी जà¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤ ा लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ की बड़ी बहन हैं। इनकी उतà¥à¤ªà¤¤à¥à¤¤à¤¿ समà¥à¤¦à¥à¤° मंथन से हà¥à¤ˆ थी। परंतॠयह देवी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ के बिलà¥à¤•à¥à¤² विपरीत हैं। यह सदैव देवी लकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ के साथ रहती हैं व इनका निवास पीपल है। शासà¥à¤¤à¥à¤°à¥‹à¤‚ ने इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दरिदà¥à¤°à¤¤à¤¾, अलकà¥à¤·à¥à¤®à¥€ व धूमवती à¤à¥€ कहा है। ये अशà¥à¤à¤¤à¤¾, पाप, आलस, गरीबी, दà¥à¤–, कà¥à¤°à¥‚पता पर आधिपतà¥à¤¯ रखती हैं। कौठपर सवार जेषà¥à¤ ा के पूजन से ये घर से दूर रहती है व जीवन से दà¥à¤–, दà¥à¤°à¥à¤à¤¾à¤—à¥à¤¯, दरिदà¥à¤°à¤¤à¤¾ को दूर करती हैं।पौराणिक मतानà¥à¤¸à¤¾à¤° जब माता सती ने पिता के यजà¥à¤ž में सà¥à¤µà¥‡à¤šà¥à¤›à¤¾ से सà¥à¤µà¤¯à¤‚ को जला कर à¤à¤¸à¥à¤® कर दिया तो उनके जलते हà¥à¤ शरीर से जो धà¥à¤†à¤‚ निकला, उससे धूमावती का जनà¥à¤® हà¥à¤†à¥¤ अतः धूमावती धà¥à¤à¤‚ के रूप में सती का à¤à¥Œà¤¤à¤¿à¤• सà¥à¤µà¤°à¥‚प हैं। धूमावती रोग, शोक और दà¥à¤– की नियंतà¥à¤°à¤• महाविदà¥à¤¯à¤¾ मानी जाती हैं। जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤· शासà¥à¤¤à¥à¤°à¤¾à¤¨à¥à¤¸à¤¾à¤° धूमावती का संबंध केतॠगà¥à¤°à¤¹ से है व इनका नकà¥à¤·à¤¤à¥à¤° जà¥à¤¯à¥‡à¤·à¥à¤ ा है। ये शà¥à¤µà¥‡à¤¤ वसà¥à¤¤à¥à¤° धारण किठहà¥à¤, खà¥à¤²à¥‡ केश रà¥à¤ª में होती हैं। जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤· के अनà¥à¤¸à¤¾à¤° वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ की कà¥à¤£à¥à¤¡à¤²à¥€ के बारहवें à¤à¤¾à¤µ से मोकà¥à¤·, बैंक से ऋण या किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार का लोन और आरà¥à¤¥à¤¿à¤• हानि का विचार किया जाता है। धूमावती महाविदà¥à¤¯à¤¾ ही à¤à¤¸à¥€ शकà¥à¤¤à¤¿ हैं जो वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ को दीनहीन अवसà¥à¤¥à¤¾ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा दिलाती हैं। वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ सà¤à¥€ करà¥à¤œà¥‹à¤‚ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ पाता है, वà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤à¤¿ पर से काले जादू टोने के पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ से मà¥à¤•à¥à¤¤à¤¿ मिलती है तथा धन व à¤à¤¶à¥à¤µà¤°à¥à¤¯ की वृदà¥à¤§à¤¿ होती है।पूजन विधि: घर की पशà¥à¤šà¤¿à¤® दिशा में सà¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¥€ रंग का वसà¥à¤¤à¥à¤° बिछाकर देवी धूमवाती का चितà¥à¤° या यंतà¥à¤° की सà¥à¤¥à¤¾à¤ªà¤¨à¤¾ कर विधिवत पूजन करें। सà¥à¤Ÿà¥€à¤² के दीपक में सरसों के तेल का दीपक करें, लोहबान से धूप करें, राख या à¤à¤à¥‚ति से तिलक करें, दोरंगे फूल चà¥à¤¾à¤à¤‚ व उड़द की खिचड़ी का à¤à¥‹à¤— लगाà¤à¤‚। किसी माला से 108 बार यह विशेष मंतà¥à¤° जपें। पूजन उपरांत à¤à¥‹à¤— पà¥à¤°à¤¸à¤¾à¤¦ सà¥à¤µà¤°à¥‚प वितरित करें।