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हाथों में तलवार लिए, घोड़ी चढ़ी दुल्हन, दिया बेटी बचाने का संदेश

बामनिया, झाबुुुआ । à¤¨à¤—र में शुक्रवार रात को जब एक दुल्हन घोड़ी पर सवार होकर गाजे-बाजे के साथ निकली तो हर शख्स उसे हैरानी से देखता रहा। युवतियां भी अपनी धुन में नाच रही थी। साथ में महिलाएं भी बराती बनकर चल रही थीं।

बामनिया निवासी सुरेंद्रसिंह देवड़ा की पुत्री कुंवर कविता की शादी नीमच के निलेश कुंवर से तय हुई। शुक्रवार रात दुल्हन की बरात निकली। गांव की गलियों से ये बरात निकली। जिस किसी ने देखा, वो अचरज से भर गया। कुवर सविता हाथ में तलवार लिए पूरे आत्मविश्वास के साथ निकली। उसकी इस इच्छा का परिवार वालों ने भी पूरा सम्मान किया। जिले में इस तरह दुल्हन के घोड़ी पर बैठकर बारात निकालने का ये पहला मामला है। वो उस जगह तक गई, जहां बारात ठहरी थी। वहां दुल्हे को न्यौता देकर वो फिर इसी तरह लौट आई।कविता कुंवर ने कहा कि बेटा और बेटियों में किसी तरह का भेद नहीं है। बेटों के बराबर ही बेटियां हैं। ऐसे में परिवार वालों ने जब इसके बारे में बताया तो मैंने भी हां कर दी। हर समाज को इस तरह की पहल करनी चाहिए ताकि बेटियां हर क्षेत्र में आगे रहे। मैं इसलिए घोड़ी पर बैठकर निकली हूं कि लड़के तो हमेशा ही घोड़ी पर सवार होकर दुल्हन को लेने आते है, लेकिन में अपने दुल्हे को शादी न्यौता देने खुद निकली। इससे मैं बेटी बचाने का संदेश देना चाहती हूं। बेटे-बेटियों में कोई अंतर नहीं किया जाए आज की बेटिया भी किसी से कम नहीं है।

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