ओंकारेशà¥â€à¤µà¤° में चांदी की पालकी में à¤à¥à¤°à¤®à¤£ पर निकले à¤à¤—वान à¤à¥‹à¤²à¥‡à¤¨à¤¾à¤¥
ओंकारेशà¥à¤µà¤°à¥¤ सावन के चौथे और अंतिम सोमवार को तीरà¥à¤¥à¤¨à¤—री में à¤à¤—वान ओंकारेशà¥à¤µà¤° और ममलेशà¥à¤µà¤° नगर à¤à¥à¤°à¤®à¤£ पर निकले हैं। इसके बाद नौका विहार होगा। à¤à¤—वान ओंकारेशà¥à¤µà¤° चांदी की पालकी में सवार होकर निकले हैं। वे करीब 10 घंटे तक à¤à¤•à¥à¤¤à¥‹à¤‚ को दरà¥à¤¶à¤¨ देंगे। इस दौरान गà¥à¤²à¤¾à¤² और गà¥à¤²à¤¾à¤¬ के फूलों से शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ सà¥à¤µà¤¾à¤—त करेंगे। बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सà¥à¤¨à¤¾à¤¨ और जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग दरà¥à¤¶à¤¨à¤¾à¤°à¥à¤¥ पहà¥à¤‚चे हैं।
सावन में निकलने वाली महासवारी सोमवार को दोपहर में मंदिर से रवाना हà¥à¤ˆà¥¤ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग à¤à¤—वान चांदी की पालकी में सवार होकर ममलेशà¥à¤µà¤° मंदिर पहà¥à¤‚चेंगे। मंदिर से रवाना होकर à¤à¤—वान की पालकी कोटितीरà¥à¤¥ घाट पहà¥à¤‚ंचेगी। यहां धारà¥à¤®à¤¿à¤• अनà¥à¤·à¥à¤ ान संपनà¥à¤¨à¥ होने के पशà¥à¤šà¤¾à¤¤ à¤à¤—वान को नौका विहार उपरांत पालकी गोमà¥à¤– घाट पहà¥à¤‚चेगी।
घाट से ढोल-बाजों के साथ शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾à¤²à¥ अगवानी कर ममलेशà¥à¤µà¤° मंदिर लेकर जाà¤à¤‚गे। यहां से à¤à¤—वान ओंकारेशà¥à¤µà¤° और ममलेशà¥à¤µà¤° की महासवारी गजानन à¤à¤•à¥à¤¤ निवास पहà¥à¤‚चेगी। यहां पर बड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤ जनमानस à¤à¤—वान के दरà¥à¤¶à¤¨ करेंगे। महासवारी बालवाड़ी से पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ बस सà¥à¤Ÿà¥ˆà¤‚ड, मà¥à¤–à¥à¤¯ बाजार, जेपी चौक, पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¥‡ पà¥à¤² से à¤à¤—वान ओंकारेशà¥à¤µà¤° जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¥à¤²à¤¿à¤‚ग की सवारी शिवपà¥à¤°à¥€ मà¥à¤–à¥à¤¯ बाजार होती हà¥à¤ˆ मंदिर पहà¥à¤‚चेगी। यहां रातà¥à¤°à¤¿ 11 बजे शयन आरती के साथ ही यातà¥à¤°à¤¾ का समापन होगा।