मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ चौहान को साहितà¥à¤¯à¤¿à¤• कृति "हà¥à¥œà¤•चà¥à¤²à¥à¤²à¥‚ संवाद" à¤à¥‡à¤‚ट
à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤² : मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ शिवराज सिंह चौहान को आज यहां मंतà¥à¤°à¤¾à¤²à¤¯ में कवि à¤à¤µà¤‚ लेखक शà¥à¤°à¥€ दिनेश मालवीय ने अपनी नई किताब “हà¥à¥œà¤•चà¥à¤²à¥à¤²à¥‚ संवाद' की पà¥à¤°à¤¤à¤¿ à¤à¥‡à¤‚ट की। शà¥à¤°à¥€ चौहान ने शà¥à¤°à¥€ मालवीय के लेखन करà¥à¤® की सराहना की।
शà¥à¤°à¥€ दिनेश मालवीय ने इस किताब में à¤à¤• कालà¥à¤ªà¤¨à¤¿à¤• चरितà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से जीवन की विदà¥à¤°à¥‚पताओं और सà¥à¤‚दरता पर अपनी तीखी और लà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¥€ टिपà¥à¤ªà¤£à¤¿à¤¯à¤¾à¤ की हैं। शà¥à¤°à¥€ मालवीय ने अपनी कड़ी मेहनत और साधना से विकसित अवलोकन कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ और शबà¥à¤¦ साधना को इस पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• में अà¤à¤¿à¤µà¥à¤¯à¤•à¥à¤¤ किया है।
शà¥à¤°à¥€ मालवीय की इस कृति को साहितà¥à¤¯à¤• संसà¥à¤¥à¤¾ कला मंदिर की ओर से पवैयà¥à¤¯à¤¾ साहितà¥à¤¯ कृति समà¥à¤®à¤¾à¤¨ से समà¥à¤®à¤¾à¤¨à¤¿à¤¤ किया जाà¤à¤—ा। शà¥à¤°à¥€ दिनेश मालवीय की किताब में कई à¤à¤¸à¥‡ पà¥à¤°à¤¸à¤‚ग हैं जो पाठक को अपने आसपास घटती गतिविधियों से जोड़ते हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इसके पहले “कहीं न पहà¥à¤à¤šà¤¾’’, “गणित के पार’’, “मेरा मानस’’ की रचना की है।