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पश्चिम बंगाल में ममता लोकप्रिय, लेकिन PM पद के लिए मोदी पहली पसंद

पश्चिम बंगाल में लगातार राजनीतिक हिंसा के लिए अधिकतर वोटर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को दोषी मानते हैं, साथ ही ममता बनर्जी सरकार की ओर से बीजेपी की रथयात्रा पर रोक लगाने के फैसले को ‘सही नहीं’ मानने वाले वोटरों की संख्या ज़्यादा है. ये निष्कर्ष एक्सिस माई इंडिया की ओर से इंडिया टुडे के लिए कराए गए पॉलिटिकल स्टॉक एक्सचेंज (PSE) के ताजा सर्वे से सामने आए हैं. हालांकि मुख्यमंत्री के लिए ममता बनर्जी लोकप्रियता के मामले में अपने प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे हैं. PSE सर्वे के मुताबिक ममता बनर्जी सरकार के कामकाज से 46% वोटर संतुष्ट हैं और 22% असंतुष्ट. सर्वे से सामने आया कि प्रधानमंत्री के लिए नरेंद्र मोदी को पहली पसंद बताने वाले वोटरों की संख्या पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक है. दूसरे नंबर पर ममता बनर्जी से कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पिछड़े हुए हैं.


बीजेपी की रथ यात्रा पर रोक का फ़ैसला 46% की राय में सही नहीं

पिछले कुछ महीनों से पश्चिम बंगाल टीएमसी और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव का केंद्र बना हुआ है. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह पश्चिम बंगाल में पार्टी का आधार बढ़ाने के लिए लगातार राज्य के दौरे कर रहे हैं. वहीं ममता बनर्जी की कोशिश देशभर के विपक्षी नेताओं को एक मंच पर लाकर 2019 लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी और बीजेपी के सामने कड़ी चुनौती पेश करने की है.

बीजेपी की रथयात्रा को पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से रोकने के फैसले को PSE सर्वे में 46% वोटरों ने सही नहीं माना. सिर्फ 26% प्रतिभागियों ने ही इस फैसले को सही बताया. PSE सर्वे में 28% वोटर इस सवाल पर कोई साफ़ राय नहीं जता सके.

दोनों पार्टियों के बीच रस्साकशी के साथ ही पश्चिम बंगाल से लगातार राजनीतिक हिंसा की ख़बरें आती रही हैं. PSE सर्वे के मुताबिक राज्य में लगातार राजनीतिक हिंसा के लिए PSE सर्वे में 28% प्रतिभागियों ने सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी को दोषी ठहराया. वहीं 14% वोटरों ने राजनीतिक हिंसा के लिए बीजेपी को जिम्मेदार माना. लेफ्ट को दोषी ठहराने वाले सिर्फ 1% प्रतिभागी ही रहे. 17% वोटरों ने इसके लिए दूसरे कारण गिनाए. 40% वोटर इस सवाल पर कोई स्पष्ट राय नहीं व्यक्त कर सके.

48% वोटर चाहते हैं बंगाल में असम की तरह NRC

क्या असम की तरह पश्चिम बंगाल में भी नागरिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर (NRC) होना चाहिए, इस सवाल के जवाब में PSE सर्वे में 48% वोटरों ने ‘हां’ में जवाब दिया. वहीं 30% प्रतिभागियों ने कहा कि पश्चिम बंगाल में नागरिकों के लिए ऐसा रजिस्टर नहीं होना चाहिए.

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