महिलाओं की शिकà¥à¤·à¤¾ के लिठखोला था सà¥à¤•ूल, पढ़िठमहातà¥à¤®à¤¾ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ के विचार
à¤à¤¾à¤°à¤¤ के महान विचारक, समाजसेवी, लेखक और दारà¥à¤¶à¤¨à¤¿à¤• कà¥à¤°à¤¾à¤‚तिकारी जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤°à¤¾à¤µ गोविंदराव फà¥à¤²à¥‡ (Jyotirao Phule) की आज जयंती है. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ का जनà¥à¤® 11 अपà¥à¤°à¥ˆà¤², 1827 को हà¥à¤† था. इतिहास के पनà¥à¤¨à¥‹à¤‚ में जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ का नाम सà¥à¤¨à¤¹à¤°à¥‡ अकà¥à¤·à¤°à¥‹à¤‚ में दरà¥à¤œ है. महातà¥à¤®à¤¾ जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ के पिता गोविंद राव à¤à¤• किसान थे और पà¥à¤£à¥‡ में फूल बेचते थे. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ बहà¥à¤¤ छोटे थे तà¤à¥€ उनकी मां का देहांत हो गया था. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ समाज में जातिगत आधारित विà¤à¤¾à¤œà¤¨ और à¤à¥‡à¤¦à¤à¤¾à¤µ के खिलाफ थे.
देश का पहला महिला सà¥à¤•ूल खोला
महिलाओं को पà¥à¤°à¥à¤·à¥‹à¤‚ के समान शिकà¥à¤·à¤¾ दी जाठइसके लिठजà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ ने देश का पहला महिला शिकà¥à¤·à¤¾ सà¥à¤•ूल खोला था. जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ की जयंती पर हम आपको बताने जा रहे है उनसे जà¥à¤¡à¤¼à¥€ कà¥à¤› खास बातें और उनके पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¤• विचार...
- जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ का परिवार फूलों के गजरे बेचने का काम करता था. इसी वजह से उनके परिवार को फà¥à¤²à¥‡ परिवार के नाम से जाना जाता था.- जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ (Jyotiba Phule) ने कà¥à¤› समय तक मराठी में पढ़ाई की थी. हालांकि उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई थी. इसके बाद उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने 21 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° में अंगà¥à¤°à¥‡à¤œà¥€ की सातवीं ककà¥à¤·à¤¾ की पढाई पूरी की थी.
- देश में महिलाओं की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ को सà¥à¤§à¤¾à¤°à¤¨à¥‡ और उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ अपनी सà¥à¤µà¤¯à¤‚ की पहचान बनाने के लिठजà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ ने 1854 में à¤à¤• सà¥à¤•ूल खोला. यह देश का पहला à¤à¤¸à¤¾ सà¥à¤•ूल था जिसे लड़कियों के लिठखोला गया था.
- लड़कियों के लिठखोले गठसà¥à¤•ूल में पढ़ाने के लिठजब उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ कोई महिला टीचर नहीं मिली तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपनी पतà¥à¤¨à¥€ सावितà¥à¤°à¥€ को पढ़ाया और इस योगà¥à¤¯ बनाया ताकि वो दूसरों को शिकà¥à¤·à¤¾ दे सकें. महिलाओं के उतà¥à¤¥à¤¾à¤¨ में किठगठकामों में कà¥à¤› लोगों ने बाधा डाली और उनके पिता पर दबाव बनाकर पतà¥à¤¨à¥€ समेत उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ घर से बाहर निकलवा दिया. इन सबके बावजूद जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ का हौसला डगमगाया नहीं और उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने लड़कियों के तीन-तीन सà¥à¤•ूल खोल दिà¤.
जà¥à¤¯à¥‹à¤¤à¤¿à¤¬à¤¾ फà¥à¤²à¥‡ के विचार
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में राषà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥€à¤¯à¤¤à¤¾ की à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ का विकास तब तक नहीं होगा, जब तक खान -पान à¤à¤µà¤‚ वैवाहिक समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¥‹à¤‚ पर जातीय बंधन बने रहेंगे.
सà¤à¥€ पà¥à¤°à¤¾à¤£à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में मनà¥à¤·à¥à¤¯ शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है. और सà¤à¥€ मनà¥à¤·à¥à¤¯à¥‹à¤‚ में नारी शà¥à¤°à¥‡à¤·à¥à¤ है. सà¥à¤¤à¥à¤°à¥€ और पà¥à¤°à¥à¤· जनà¥à¤® से ही सà¥à¤µà¤¤à¤‚तà¥à¤° है. इसलिठदोनों को सà¤à¥€ अधिकार सामान रूप से à¤à¥‹à¤—ने का अवसर मिलना चाहिà¤.
सà¥à¤µà¤¾à¤°à¥à¤¥ अलग-अलग रूप धारण करता है.कà¤à¥€ जाती का रूप लेता है तो कà¤à¥€ धरà¥à¤® का.
आरà¥à¤¥à¤¿à¤• असमानता के कारण किसानों का जीवन असà¥à¤¤-वà¥à¤¯à¤¸à¥à¤¤ हो गया है.