तानसेन की समाधि पर हरिकथा के साथ समारोह की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤°à¥¤ तानसेन की समाधि पर शà¥à¤•à¥à¤°à¤µà¤¾à¤° सà¥à¤¬à¤¹ शहनाई वादन और ढोली बà¥à¤† महाराज की हरिकथा के साथ तानसेन समारोह की पारंपरिक शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ हà¥à¤ˆà¥¤ सचà¥à¤šà¤¿à¤¦à¤¾à¤¨à¤‚द नाथ ढोलीबà¥à¤† महाराज की हरिकथा के बाद मौलाना इकबाल लशà¥à¤•र ने मौलूद शरीफ का गायन किया। इसके बाद तानसेन और उनके आधà¥à¤¯à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤¿à¤• गà¥à¤°à¥ मोहमà¥à¤®à¤¦ गौस की मजार पर चादरपोशी हà¥à¤ˆà¥¤ तानसेन की समाधि पर सरà¥à¤µà¤§à¤°à¥à¤® सदà¥à¤§à¤¾à¤µ की सरिता को देखने के लिठबड़ी संखà¥à¤¯à¤¾ में लोग पहà¥à¤‚चे थे।