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हंगामों के बावजूद शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन खुश हुए आडवाणी!

लोकसभा में चल रहे हंगामे से आहत बीजेपी के मार्गदर्शक लालकृष्ण आडवाणी आज खासे खुश नजर आए। लोकसभा के सत्रावसान के बाद सभी दलों के बड़े नेता अनौपचारिक मुलाकात के स्पीकर सुमित्रा महाजन के कमरे में पहुंचे, तो लालकृष्ण आडवाणी ने आखिरी दिन के काम काज पर संतुष्टि जतायी। सूत्रों ने बताया कि आडवाणी ने स्पीकर से कहा कि आज मैं काफी संतुष्ट हूं। आज जिस तरह सदन में सार्थक चर्चा हुई उससे बड़ा अच्छा लगा। पिछले सारे दिन के घटनाक्रम के बाद ये एक सार्थक दिन था। तमाम पार्टियों के आला नेताओं का स्पीकर के कमरे में आना जाना लगा हुआ था। पीएम मोदी, सोनिया गांधी, राजनाथ सिंह, मल्लिकार्जुन खड़गे जैसे नेता भी स्पीकर के कमरे में पहुंचे थे।

सूत्रों की माने तो मार्गदर्शन आडवाणी की बातें सुनकर वहां मौजुद तमाम नेता मुस्कुरा दिए। सूत्र ये भी बताते हैं कि स्पीकर के कमरे में हुई इन अनौपचारिक मुलाकातों के दौर में दलों के बीच कोई कडवाहट भी नजर नहीं आयी। सुमित्रा महाजन ने भी उम्मीद जतायी कि अगले बजट सत्र में फिर मिलें तो ऐसे ही मिलजुल कर काम होता रहेगा।

सत्र के आखिरी दिन भी लोकसभा को दिव्यांग को ज्यादा अधिकार देने का बिल पास करना था। विपक्ष का मूड जानते हुए सरकार भी तैयार बैठी थी कि हंगामें के बीच ही पास करा लिया जाए। पर स्पीकर सुमीत्रा महाजन ने कोशिशें जारी रखी कि महत्वपूर्ण दिव्यांगो के लिए अति महत्वपूर्ण इस बिल को पास करने में सभी पार्टियां एकजुट दिखें तो बेहतर संदेश जाएगा। सरकार भी चाहती थी कि सब एक हो जाएं तो ही बेहतर। ऐसे में तमाम पार्टियों ने एकजुटता दिखाई। बिल पास भी हो गया। यही लोकतंत्र की मजबूती है कि तमाम मनभेद और मतभेद होने के बावजुद अगर एक अच्छे काम के लिए एकजुटता दिखानी हो तो सब एक हो जाते हैं।

अब बात राहुल बनाम पीएम मोदी की। दोनों एक दूसरे पर नोटबंदी के लेकर अरसे से हल्ला बोल रहे थे। विपक्ष की सदन की एकजुटता भी सड़क पर नजर नहीं आ रही थी। यहां भी तमाम क़वाहट भूल कर युवराज राहुल अपने सिपहसालारों के साथ जा पहुंचे पीएम मोदी के पास। वो भी किसानों की समस्या बांटने। उत्तर प्रदेश के किसानों के खस्ता हाल की शिकायत की और पीएम को बताया कि न वहां के किसानों के बिजली मिलती है उलटे उन्हें बड़े बिजली के बिल मिल जाते हैं। जाहिर है शिकायत अखिलेश सरकार से थी।  ऐसे में न सपा साथ आयी और न ही बसपा। लेकिन अब राहुल ने एक कदम आगे बढाए तो पीएम मोदी भला कैसे पीछे हटते। राहुल को कह दिया मिलते रहा कीजिए। यानि मिलते जुलते रहे तो कड़वाहट अपने आप दूर होती चली जाएगी।

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