गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब के जीवन पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ लगी
गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° । सिकà¥à¤–ों के छठवें गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब जी के जीवन वृतांत पर आधानित चितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ का सोमवार को सांसद शà¥à¤°à¥€ विवेक नारायण शेजवलकर ने उदघाटन किया। दाताबंदी छोड़ दिवस के 400 वरà¥à¤· पूरà¥à¤£ होने के उपलकà¥à¤·à¥à¤¯ में यह पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° किला सà¥à¤¥à¤¿à¤¤ गà¥à¤°à¥‚दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ परिसर में पंजाबी साहितà¥à¤¯ अकादमी, मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ संसà¥à¤•ृति परिषद और राजà¥à¤¯ शासन के संसà¥à¤•ृति विà¤à¤¾à¤— दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ लगाई गई है। आजादी के अमृत महोतà¥à¤¸à¤µ के उपलकà¥à¤·à¥à¤¯ में लगाई गई यह पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ 6 अकà¥à¤Ÿà¥‚बर तक लगी रहेगी। शà¥à¤°à¥€ शेजवलकर à¤à¤µà¤‚ अनà¥à¤¯ अतिथियों ने दाताबंदी छोड़ गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब के जीवन पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ पà¥à¤¸à¥à¤¤à¤• का विमोचन à¤à¥€ इस अवसर पर किया।
चितà¥à¤° पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ के शà¥à¤à¤¾à¤°à¤‚ठअवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत à¤à¤µà¤‚ कला विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‹. साहितà¥à¤¯ कà¥à¤®à¤¾à¤° नाहर, संत शà¥à¤°à¥€ दंदरौआ महाराज, ढोली बà¥à¤† महाराज, समरà¥à¤¥ तीरà¥à¤¥ महाराज व बाबा देवेनà¥à¤¦à¥à¤° सिंह सहित अनà¥à¤¯ संतजन, à¤à¤¾à¤œà¤ªà¤¾ जिला अधà¥à¤¯à¤•à¥à¤· शà¥à¤°à¥€ कमल माखीजानी, पूरà¥à¤µ महापौर शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ समीकà¥à¤·à¤¾ गà¥à¤ªà¥à¤¤à¤¾, पंजाबी साहितà¥à¤¯à¤•ार à¤à¤µà¤‚ वरिषà¥à¤ कवि शà¥à¤°à¥€ हरà¤à¤œà¤¨ सिंह देओल, पंजाबी साहितà¥à¤¯ अकादमी की निदेशक शà¥à¤°à¥€à¤®à¤¤à¥€ नीरू सिंह जà¥à¤žà¤¾à¤¨à¥€ तथा शà¥à¤°à¥€ धरà¥à¤®à¥‡à¤¨à¥à¤¦à¥à¤° सिंह राणा सहित अनà¥à¤¯ जनपà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¨à¤¿à¤§à¤¿à¤—ण व गणमानà¥à¤¯ नागरिक मौजूद थे।
सांसद शà¥à¤°à¥€ विवेक नारायण शेजवलकर ने इस अवसर पर कहा कि गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब जी ने अपना सारा जीवन धरà¥à¤®, संसà¥à¤•ृति à¤à¤µà¤‚ देश की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठसमरà¥à¤ªà¤¿à¤¤ कर दिया। गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब ने à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और शकà¥à¤¤à¤¿ के रूप में दो तलवारें धारण कीं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने यह संदेश दिया कि à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ के लिठशकà¥à¤¤à¤¿ और शकà¥à¤¤à¤¿ पर à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ का नियंतà¥à¤°à¤£ जरूरी है। शà¥à¤°à¥€ शेजवलकर ने कहा कि सिकà¥à¤– धरà¥à¤® की महान परंपरा व निषà¥à¤ ा सà¤à¥€ के लिठअनà¥à¤•रणीय है।
संत शà¥à¤°à¥€ दंदरौआ महाराज ने कहा कि सेवा ही à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ है। इसी à¤à¤¾à¤µ के साथ सिकà¥à¤– समाज जनसेवा में जà¥à¤Ÿà¤¾ है। साथ ही सिकà¥à¤– समाज दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ परà¥à¤¯à¤¾à¤µà¤°à¤£ की रकà¥à¤·à¤¾ के लिठवृहद सà¥à¤¤à¤° पर किया जा रहा वृकà¥à¤·à¤¾à¤°à¥‹à¤ªà¤£ सà¤à¥€ के लिठअनà¥à¤•रणीय है। संत शà¥à¤°à¥€ ढोली बà¥à¤† महाराज à¤à¤µà¤‚ समरà¥à¤¥ तीरà¥à¤¥ महाराज ने सिकà¥à¤– धरà¥à¤® की अचà¥à¤›à¤¾à¤ˆà¤¯à¥‹à¤‚ पर पà¥à¤°à¤•ाश डाला। सिकà¥à¤– समाज की मानà¥à¤¯à¤¤à¤¾ है कि à¤à¤• ही नूर से सारा जग उपजा है। यदि सà¤à¥€ लोग इस सूतà¥à¤° को अपने जीवन में ढाल लें तो अशांति, अजà¥à¤žà¤¾à¤¨à¤¤à¤¾ व बैर à¤à¤¾à¤µ सà¥à¤µà¤¤: ही समापà¥à¤¤ हो जाà¤à¤—ा।
संगीत à¤à¤µà¤‚ कला विशà¥à¤µà¤µà¤¿à¤¦à¥à¤¯à¤¾à¤²à¤¯ के कà¥à¤²à¤ªà¤¤à¤¿ पà¥à¤°à¥‹. नागर ने कहा कि सिकà¥à¤– गà¥à¤°à¥‚ओं ने पूरे समाज को जोड़कर पà¥à¤°à¥‡à¤® à¤à¤¾à¤µ का संचार किया। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® का संचालन शà¥à¤°à¥€ अशोक आनंद ने किया।
मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ चौहान का शà¥à¤à¤•ामना संदेश पà¥à¤•र सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾
पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ शिवराज सिंह चौहान ने दाताबंदी छोड़ दिवस के 400 वरà¥à¤· पूरà¥à¤£ होने के उपलकà¥à¤·à¥à¤¯ में गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° में आयोजित हà¥à¤ कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® के लिठबधाई à¤à¤µà¤‚ शà¥à¤à¤•ामनाà¤à¤ à¤à¥‡à¤œà¥€ हैं। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने अपने शà¥à¤à¤•ामना संदेश में कहा है कि गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब ने राषà¥à¤Ÿà¥à¤° रकà¥à¤·à¤¾, नà¥à¤¯à¤¾à¤¯ व धरà¥à¤® के लिठमीरी-पीरी (à¤à¤•à¥à¤¤à¤¿ और शकà¥à¤¤à¤¿) का आहà¥à¤µà¤¾à¤¨ कर धरà¥à¤® व समाज की रकà¥à¤·à¤¾ की अलख जगाई। गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब जी के कृतितà¥à¤µ लोक मानस के लिये पà¥à¤°à¥‡à¤°à¤£à¤¾à¤¦à¤¾à¤¯à¥€ हैं। कारà¥à¤¯à¤•à¥à¤°à¤® में पà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ की संसà¥à¤•ृति मंतà¥à¤°à¥€ सà¥à¤¶à¥à¤°à¥€ ऊषा ठाकà¥à¤° का संदेश à¤à¥€ पà¥à¤•र सà¥à¤¨à¤¾à¤¯à¤¾ गया।
गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब के जीवन के विविध पहलà¥à¤“ं पर केनà¥à¤¦à¥à¤°à¤¿à¤¤ है पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€
गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब जी के जीवन पर आधारित पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¨à¥€ में उनके परोपकारी कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को उजागर किया गया। साथ ही उनके जनà¥à¤® से लेकर महापà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤£ तक की समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ जीवन यातà¥à¤°à¤¾ और उनके परोपकारी कारà¥à¤¯à¥‹à¤‚ को चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से बखूबी ढंग से पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ किया गया है। गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब ने गà¥à¤µà¤¾à¤²à¤¿à¤¯à¤° किले से अपने साथ 52 निरà¥à¤¦à¥‹à¤· राजाओं को रिहा कराने संबंधी कथा à¤à¥€ चितà¥à¤° के माधà¥à¤¯à¤® से उलà¥à¤²à¥‡à¤–ित की गई है। इसमें उलà¥à¤²à¥‡à¤– है कि गà¥à¤°à¥‚ साहिब ने 52 कलियों वाला चोला पहनकर पà¥à¤°à¤¤à¥à¤¯à¥‡à¤• राजा से à¤à¤• कली को पकड़कर बाहर आने के लिये कहा था। तà¤à¥€ से गà¥à¤°à¥‚ हरिगोबिंद साहिब को “दाता बंदी छोड़” कहकर याद किया जाता है। अकाल तखà¥à¤¤ का निरà¥à¤®à¤¾à¤£, संत सिपाही के रूप में जीवन, गरीब का मà¥à¤à¤¹ गà¥à¤°à¥‚ की गोलक, नूर जहाठको शिकà¥à¤·à¤¾, करतारपà¥à¤° की जंग, अमृतसर का यà¥à¤¦à¥à¤§, हरिगोबिंदपà¥à¤° की जंग व जहांगीर का अमृतसर दौरा सहित गà¥à¤°à¥‚ साहिब के समà¥à¤ªà¥‚रà¥à¤£ जीवन वृतांत को चितà¥à¤°à¥‹à¤‚ के माधà¥à¤¯à¤® से पà¥à¤°à¤¦à¤°à¥à¤¶à¤¿à¤¤ किया गया है।