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गुरू हरिगोबिंद साहिब के जीवन पर केन्द्रित प्रदर्शनी लगी

ग्वालियर । सिक्खों के छठवें गुरू हरिगोबिंद साहिब जी के जीवन वृतांत पर आधानित चित्र प्रदर्शनी का सोमवार को सांसद श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने उदघाटन किया। दाताबंदी छोड़ दिवस के 400 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में यह प्रदर्शनी ग्वालियर किला स्थित गुरूद्वारा परिसर में पंजाबी साहित्य अकादमी, मध्यप्रदेश संस्कृति परिषद और राज्य शासन के संस्कृति विभाग द्वारा लगाई गई है। आजादी के अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में लगाई गई यह प्रदर्शनी 6 अक्टूबर तक लगी रहेगी। श्री शेजवलकर एवं अन्य अतिथियों ने दाताबंदी छोड़ गुरू हरिगोबिंद साहिब के जीवन पर केन्द्रित पुस्तक का विमोचन भी इस अवसर पर किया। 

 à¤šà¤¿à¤¤à¥à¤° प्रदर्शनी के शुभारंभ अवसर पर राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. साहित्य कुमार नाहर, संत श्री दंदरौआ महाराज, ढोली बुआ महाराज, समर्थ तीर्थ महाराज व बाबा देवेन्द्र सिंह सहित अन्य संतजन, भाजपा जिला अध्यक्ष श्री कमल माखीजानी, पूर्व महापौर श्रीमती समीक्षा गुप्ता, पंजाबी साहित्यकार एवं वरिष्ठ कवि श्री हरभजन सिंह देओल, पंजाबी साहित्य अकादमी की निदेशक श्रीमती नीरू सिंह ज्ञानी तथा श्री धर्मेन्द्र सिंह राणा सहित अन्य जनप्रतिनिधिगण व गणमान्य नागरिक मौजूद थे। 

 à¤¸à¤¾à¤‚सद श्री विवेक नारायण शेजवलकर ने इस अवसर पर कहा कि गुरू हरिगोबिंद साहिब जी ने अपना सारा जीवन धर्म, संस्कृति एवं देश की रक्षा के लिए समर्पित कर दिया। गुरू हरिगोबिंद साहिब ने भक्ति और शक्ति के रूप में दो तलवारें धारण कीं। उन्होंने यह संदेश दिया कि भक्ति के लिए शक्ति और शक्ति पर भक्ति का नियंत्रण जरूरी है। श्री शेजवलकर ने कहा कि सिक्ख धर्म की महान परंपरा व निष्ठा सभी के लिए अनुकरणीय है। 

 à¤¸à¤‚त श्री दंदरौआ महाराज ने कहा कि सेवा ही भक्ति है। इसी भाव के साथ सिक्ख समाज जनसेवा में जुटा है। साथ ही सिक्ख समाज द्वारा पर्यावरण की रक्षा के लिए वृहद स्तर पर किया जा रहा वृक्षारोपण सभी के लिए अनुकरणीय है। संत श्री ढोली बुआ महाराज एवं समर्थ तीर्थ महाराज ने सिक्ख धर्म की अच्छाईयों पर प्रकाश डाला। सिक्ख समाज की मान्यता है कि एक ही नूर से सारा जग उपजा है। यदि सभी लोग इस सूत्र को अपने जीवन में ढाल लें तो अशांति, अज्ञानता व बैर भाव स्वत: ही समाप्त हो जाएगा। 

संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नागर ने कहा कि सिक्ख गुरूओं ने पूरे समाज को जोड़कर प्रेम भाव का संचार किया। कार्यक्रम का संचालन श्री अशोक आनंद ने किया। 

 

मुख्यमंत्री श्री चौहान का शुभकामना संदेश पढ़कर सुनाया 

 

 à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶ के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने दाताबंदी छोड़ दिवस के 400 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में ग्वालियर में आयोजित हुए कार्यक्रम के लिए बधाई एवं शुभकामनाएँ भेजी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा है कि गुरू हरिगोबिंद साहिब ने राष्ट्र रक्षा, न्याय व धर्म के लिए मीरी-पीरी (भक्ति और शक्ति) का आह्वान कर धर्म व समाज की रक्षा की अलख जगाई। गुरू हरिगोबिंद साहिब जी के कृतित्व लोक मानस के लिये प्रेरणादायी हैं। कार्यक्रम में प्रदेश की संस्कृति मंत्री सुश्री ऊषा ठाकुर का संदेश भी पढ़कर सुनाया गया। 

 

गुरू हरिगोबिंद साहिब के जीवन के विविध पहलुओं पर केन्द्रित है प्रदर्शनी 

 

 à¤—ुरू हरिगोबिंद साहिब जी के जीवन पर आधारित प्रदर्शनी में उनके परोपकारी कार्यों को उजागर किया गया। साथ ही उनके जन्म से लेकर महाप्रयाण तक की सम्पूर्ण जीवन यात्रा और उनके परोपकारी कार्यों को चित्रों के माध्यम से बखूबी ढंग से प्रदर्शित किया गया है। गुरू हरिगोबिंद साहिब ने ग्वालियर किले से अपने साथ 52 निर्दोष राजाओं को रिहा कराने संबंधी कथा भी चित्र के माध्यम से उल्लेखित की गई है। इसमें उल्लेख है कि गुरू साहिब ने 52 कलियों वाला चोला पहनकर प्रत्येक राजा से एक कली को पकड़कर बाहर आने के लिये कहा था। तभी से गुरू हरिगोबिंद साहिब को “दाता बंदी छोड़” कहकर याद किया जाता है। अकाल तख्त का निर्माण, संत सिपाही के रूप में जीवन, गरीब का मुँह गुरू की गोलक, नूर जहाँ को शिक्षा, करतारपुर की जंग, अमृतसर का युद्ध, हरिगोबिंदपुर की जंग व जहांगीर का अमृतसर दौरा सहित गुरू साहिब के सम्पूर्ण जीवन वृतांत को चित्रों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है।

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