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यात्रियों की सुरक्षा का प्रति गंभीर नहीं रेलवे

जबलपुर। मध्य प्रदेश के जबलपुर रेल मंडल के एक माह के भीतर हुए तीन रेल हादसों की जांच जारी है। रेलवे ने दुर्घटनाओं के कारण जानने और दोषियों को चिह्नित करने के लिए विभिन्न स्तर पर जांच समिति गठित कीं, लेकिन सभी मामलों की जांच अधूरी है। जबलपुर रेल मंडल सीमा क्षेत्र की बात करें, तो 14 अगस्त को कटनी-बीना रेल खंड में असलाना पथरिया स्टेशन पर मालगाड़ी के नौ डिब्बे पटरी से उतर गए। घटना को एक माह पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन अभी तक इसकी जांच रिपोर्ट जबलपुर डीआरएम तक नहीं पहुंची है।

कुछ पुराने रेल हादसों की जांच में भी लीपापोती करने की बात भी सामने आई है। वास्तविक दोषियों को बचाने के लिए समिति अपनी जांच रिपोर्ट में कई विभागों के साथ कई अधिकारी और कर्मचारियों को दोषी ठहराया गया है।

तीन केस गवाह, रेलवे नहीं है गंभीर
केस-1: 14 अगस्त को दमोह के असलाना पथरिया स्टेशन पर मालगाड़ी के नौ डिब्बे पटरी से उतर गए। इसकी जांच में पहले इंजीनियरिंग विभाग की लापरवाही सामने आई, लेकिन जांच जब जे ग्रेड स्तर के अधिकारियों ने की तो इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों को बचाने के लिए कमर्शियल और वैगन विभाग को बता दिया गया।
केस-2: इस वर्ष फरवरी माह में आस्था स्पेशल ट्रेन से ट्राली टकराई थी। इस मामले में पहले जांच समिति ने इसे सामान्य हादसा बताया। ट्रेन से टकराई ट्राली को ही गायब कर दिया गया और आरपीएफ की जांच के दौरान दूसरी ट्राली दिखा दी गई। घटना के दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
केस-3: चार दिन पूर्व ओवरनाइट एक्सप्रेस की दो बोगी चार जबलपुर रेलवे स्टेशन पर पटरी से उतर गईं थीं। जांच कर रहे अधिकारियों ने पूरी गलती कोच पर डाल दी, जबकि लापरवाही प्वाइंट पर हुई। यहां तक की इस प्वाइंट पर पहले भी कई रेल हादसे हुए, लेकिन इसे सुधारा नहीं गया। जबकि रीस्ट्रक्चरिंग के नाम पर करोड़ों खर्च किए जा चुके हैं।

रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करते, पर कार्रवाई होती है
दमोह में हुए मालगाड़ी हादसे की रिपोर्ट अभी मेरे पास आनी है। जल्द ही इसके कारणों की वजह सामने आ जाएगी। हम जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं करते हैं। घटना में जो भी दोषी होता है, उसे नियमानुसार कार्रवाई करते हैं। सभी जांच एजेंसियों की जांच करने की समय सीमा तय है, लेकिन इसमें वक्त लग ही जाता है, जब तक सही कारण समझ न आए, जांच चलती रहती है। इसमें समय लगता है। -विवेक शील, डीआरएम, जबलपुर

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