HONDA4D
HONDA4D
HOTEL4D
HOTEL4D
HEBAT789
HONDA4D
HONDA4D
HONDA4D
HOTEL4D
HOTEL4D
HOTEL4D
https://nntvbharat.com/
https://thekhabardaily.in/
https://ungali.in/
https://uniquetodaynews.in/
https://bhaskarplus.com/
https://hindustansamaj.com/
https://janmatyugnews.com/
https://johardesh.com/
https://kartiknews.in/
https://khulasatimes.com/
https://nandkesari.com/
https://newsmailtoday.com/
https://aapkamat.com/
https://ajaybharat.com/
https://ajnabinews.com/
https://atoznewslive.com/
https://ljcricket.com/
https://profedinstvo.com
https://TheOriginalMiracles.net/
https://fustar.org/
https://emilianotardif.com/
https://operaoberta.org/
https://ebaratomomi.com/
https://skatepedia.net
https://afghanchurch.net/
https://hornethistory.com
https://TodaYeggRates.net
https://emulyankan.com
https://turnhardware.net
https://pardesusa.org/
https://gochanggut.org/
Diwali 2025 की तारीख पर दूर हुआ कंफ्यूजन, इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा करना होगा फलदायी
ग्वालियर। इस वर्ष में कार्तिक अमावस्या पर श्रीमहालक्ष्मी के पूजन और दीपदान को लेकर भ्रम की स्थिति है। भ्रम का कारण सोमवार व मंगलवार को अमावस्या तिथि का होना है। ज्योतिष विद्वानों ने इस भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए 20 अक्टूबर सोमवार को श्रीमहालक्ष्मी पूजन को श्रेष्ठ फलदायी होने के साथ शास्त्र सम्मत बताया है।
ज्योतिषाचार्य पं रवि शर्मा ने बताया कि इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति केवल 14 मिनट की है। यह अवधि एक घटिका (24 मिनट) से भी बहुत कम है। पूजा के कर्मकाल के लिए इतनी अल्पअवधि को केवल 'स्पर्श मात्र' ले सकते हैं। यह दीपावली हेतु पर्याप्त आधार प्रदान करने योग्य नहीं।
धर्मसिंधु का निर्णय सूत्र
जब ऐसी स्थिति उत्पन्न हो कि एक दिन पूर्ण व्याप्ति हो और दूसरे दिन न हो, तो धर्मसिंधु का निम्नलिखित सूत्र निर्णय को अंतिम रूप देता है:
पूर्वत्रैवप्रदोषव्याप्तौलक्ष्मीपूजादौपूर्वा अभ्यंगस्नानादौपरा॥
अर्थात यदि केवल पूर्व पहले दिन ही प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति हो, तो लक्ष्मी पूजन आदि पूर्व पहले दिन ही करना चाहिए। अभ्यंग स्नान आदि अगले दिन किया जा सकता है। 20 अक्टूबर को 'पूर्वत्रैव प्रदोषव्याप्ति' (केवल पहले दिन प्रदोष व्याप्ति) है, अगले दिन केवल स्पर्श मात्र है इसलिए लक्ष्मी पूजन इसी दिन होगा।
उपरोक्त सभी शास्त्रीय प्रमाणों, तर्कों और पंचांग के गणितीय विश्लेषण से यह निर्विवाद रूप से सिद्ध होता है कि दीपावली का मुख्य पर्व, लक्ष्मी-गणेश पूजन और दीपदान 20 अक्टूबर, सोमवार को ही करना शुभ, मंगलकारी और शास्त्र सम्मत है। 21 अक्टूबर को प्रदोष काल में अमावस्या की व्याप्ति एक घटिका भी न होने के कारण उसे लक्ष्मी पूजन के लिए ग्रहण नहीं किया जा सकता। वह दिन अमावस्या के स्नान दान और श्राद्ध कर्मों के लिए मान्य होगा।
20 अक्टूबर, सोमवार
सूर्यास्त: लगभग पांच बजकर 42 मिनट
प्रदोष काल का आरंभ: पांच बजकर 42 मिनट से अमावस्या तिथि का आरंभ पांच बजकर 45 मिनट से
इस दिन प्रदोष काल के आरंभ से लेकर संपूर्ण रात्रि तक अमावस्या तिथि की अखंड और संपूर्ण व्याप्ति है। यह लक्ष्मी पूजन के लिए सबसे आदर्श और शास्त्र सम्मत स्थिति है।
21 अक्टूबर , मंगलवार
सूर्यास्त: लगभग पांच बजकर 41 मिनट से
प्रदोष काल: आरंभ पांच बजकर 41 मिनट से
अमावस्या तिथि की समाप्ति पांच बजकर 55 मिनट पर
इस दिन प्रदोष काल में अमावस्या की उपस्थिति केवल 14 मिनट की है। यह अवधि एक घटिका (24 मिनट) से भी बहुत कम है। पूजा के कर्मकाल के लिए इतनी अल्प अवधि को केवल 'स्पर्श मात्र' ले सकते हैं। यह दीपावली हेतु पर्याप्त आधार प्रदान करने योग्य नहीं।

