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जà¥à¤—-जà¥à¤— जिये मेरा शिवराज बेटा
à¤à¥‹à¤ªà¤¾à¤²à¥¤ नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ में शामिल सैकड़ों यातà¥à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ में से à¤à¤• है à¤à¥‚रिया बाई, जो मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शिवराज सिंह चौहान को हर पल हर दिन दà¥à¤†à¤à¤ देती हैं। à¤à¥‚रिया बाई बताती हैं कि 90 वरà¥à¤· की उमà¥à¤° हो जाने तक उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने कà¤à¥€ सोचा à¤à¥€ नहीं था कि वे नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ के उतà¥à¤¤à¤°à¥€ और दकà¥à¤·à¤¿à¤£à¥€ तटों की परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ कर सकेंगी। नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ में शà¥à¤°à¥ से ही साथ चल रही à¤à¥‚रिया बाई बताती है कि वरà¥à¤·à¥‹à¤‚ से होशंगाबाद जिले के सिवनी-मालवा कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° के गà¥à¤°à¤¾à¤® मकड़ाई में रहने के कारण उनकी माठनरà¥à¤®à¤¦à¤¾ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ तो अगाध शà¥à¤°à¤¦à¥à¤§à¤¾ थी, पर पारिवारिक जिमà¥à¤®à¥‡à¤¦à¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ और गरीबी के कारण नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ की इचà¥à¤›à¤¾ होते हà¥à¤ à¤à¥€ वे कà¤à¥€ परिकà¥à¤°à¤®à¤¾ नहीं कर सकी।
à¤à¥‚रिया बाई बताती है कि नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ से उनका जीवन धनà¥à¤¯ हो गया है। पिछले 5 महीने से हर दिन माठनरà¥à¤®à¤¦à¤¾ के दरà¥à¤¶à¤¨ वे कर रही हैं। यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ खाने-पीने और रहने की कोई चिंता नहीं रही। यातà¥à¤°à¤¾ में फà¥à¤°à¥à¤¸à¤¤ के कà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में वे राम-नाम लेखन का पà¥à¤£à¥à¤¯ à¤à¥€ कमा रही हैं। à¤à¥‚रिया बाई बताती हैं कि 2 माह पूरà¥à¤µ जब वे सीहोर जिले के जहाजपà¥à¤° गà¥à¤°à¤¾à¤® में नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ में मगà¥à¤¨ होकर नाच रही थी, तो मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ शà¥à¤°à¥€ चौहान की नजर उन पर पड़ गयी। मà¥à¤–à¥à¤¯à¤®à¤‚तà¥à¤°à¥€ ने सà¥à¤Ÿà¥‡à¤œ से उतरकर न केवल उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ गले लगाया, बलà¥à¤•ि उनका पà¥à¤°à¤¾à¤¨à¤¾ टूटा चशà¥à¤®à¤¾ देखकर नया दिला दिया। नया चशà¥à¤®à¤¾ मिलने से उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ दिखाई नहीं देने वाली समसà¥à¤¯à¤¾ से छà¥à¤Ÿà¤•ारा मिल गया। अनूपपà¥à¤° जिले के गà¥à¤°à¤¾à¤® खेतगाà¤à¤µ में à¤à¥‚रिया बाई से जब चरà¥à¤šà¤¾ की गयी तो उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने खà¥à¤¶à¥€-खà¥à¤¶à¥€ बताया कि जब वे यातà¥à¤°à¤¾ में शामिल हà¥à¤ˆ थी, तो सोचा à¤à¥€ नहीं था कि वे पूरे 5 माह तक यातà¥à¤°à¤¾ के साथ चलकर अमरकंटक तक वापस पहà¥à¤à¤šà¥‡à¤—ी। उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ डर था कि उमà¥à¤° जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होने के कारण उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ आ सकती है। à¤à¥‚रिया बाई बताती हैं कि उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने बचपन में बà¥à¤œà¥à¤°à¥à¤—ों से सà¥à¤¨à¤¾ था कि नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ मैया के à¤à¤• बार दरà¥à¤¶à¤¨ से जीवन सà¥à¤§à¤° जाता है। मैं सौà¤à¤¾à¤—à¥à¤¯à¤¶à¤¾à¤²à¥€ हूठकि मà¥à¤à¥‡ 5 महीने से रोजाना सà¥à¤¬à¤¹ नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ माठके दरà¥à¤¶à¤¨ हो रहे हैं।
à¤à¥‚रिया बाई यह à¤à¥€ बताती हैं कि नरà¥à¤®à¤¦à¤¾ सेवा यातà¥à¤°à¤¾ के दौरान वे जिन-जिन गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥‹à¤‚ में गईं, वहाठके शासकीय करà¥à¤®à¤šà¤¾à¤°à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚, पंच और सरपंच से गाà¤à¤µ में अपनी उपसà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के लिठडायरी में लिखवा लेती है। चरà¥à¤šà¤¾ करने पर à¤à¥‚रिया बाई अपने थैले से डायरी निकालकर दिखाती है और कहती है कि ''जà¥à¤—-जà¥à¤— जिये मेरा शिवराज बेटा''।