छह गांवों ने इतने पेड़ लगाठकि अब यहां बनेगा जंगली जानवरों का घर
सागर (मधà¥à¤¯à¤ªà¥à¤°à¤¦à¥‡à¤¶).सागर से 15 किमी दूर है आमेठगांव। यहीं 4000 हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° में à¤à¤• जंगल फैला हà¥à¤† है। इसे छह गांवों ने बसाया है। जंगल बसाने में गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ ने 34 साल तक संघरà¥à¤· किया है। दरअसल लकड़ी माफियाओं ने पेड़ों को काटकर पहाड़ियों को पूरी तरह वीरान कर दिया था। सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ यह हो गई कि गांव को बिगड़े वन कà¥à¤·à¥‡à¤¤à¥à¤° की शà¥à¤°à¥‡à¤£à¥€ में रख दिया गया था। बदलाव की शà¥à¤°à¥à¤†à¤¤ गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ ने ही की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने सबसे पहले यहां से लकड़ी माफिया को खदेड़ा। इसके बाद वन विà¤à¤¾à¤— ने सà¤à¥€ गांवों में वन समितियां बनाकर हर घर से à¤à¤• सदसà¥à¤¯ को जंगल बसाने की टीम में शामिल किया। 34 साल तक लोगों ने मिलकर पहाड़ पर दोबारा यह जंगल तैयार किया है। जंगल तो अब वन जीवों का घर à¤à¥€ बन गया है इसलिठपà¥à¤°à¤¶à¤¾à¤¸à¤¨ ने यहां 100 हेकà¥à¤Ÿà¥‡à¤¯à¤° में चिड़ियाघर बनाने की घोषणा की है। गà¥à¤°à¤¾à¤®à¥€à¤£à¥‹à¤‚ के संघरà¥à¤· को डॉकà¥à¤¯à¥‚मेंटà¥à¤°à¥€ के रूप में दिखाने की तैयारी हो रही है।