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कपट से खतरनाक दंभ है: मोरारी बापू

छोडऩा है तो ईष्र्या, द्वेष, निंदा व अहंकार छोड़ो
श्रीराम कथा में श्रोताओं की उमड़ रही है भीड़


ग्वालियर। कपट से खतरनाक दंभ है। कमजोरियों को जो लोग छुपाते है, उन्हें कपटी कहते हैं और अच्छाईयों के न होते हुए अपने को अच्छा बताए वह दंभ है, अंहकारी है। ईष्र्या, द्वेष, निंदा करना छोड़ों, आंखों में आक्रोश मत रखो, ऐसा करने से आपका जीवन सार्थक बन जाएगा। यह विचार मानस मर्मक्ष मोरारी बापू ने चित्रकूट धाम फूलबाग मैदान पर श्रीराम कथा के तीसरे दिन कथा का रसपान करते हुए व्यक्त किए। श्रीराम कथा का शुभारंभ मोरारी बापू ने यह चौपाई पढक़र की ‘रूचि महेश निज मानस राखा, पाई सुसमय सिवासन भाषा, राम कथा मुनि वर्ज बखानी, सुनि महेश परम सुख मानी’ संत श्री बापू ने कथा में कहा कि बौद्ध धर्म में तीन प्रकार की काया का उल्लेख है, जिसमें कामकाया, धर्मकाया और निर्माण काया, मगर मैं एक और काया का नाम जोड़ता हूं वो है प्रेमकाया। उन्होंने कहा कि मर्यादा में रहकर विलास करो, इन्जॉय करो, मेरी कथा का रसपान करो। नौ दिन मुझे कथा में दो, मैं जीवन बदल दूंगा। उन्होंने कहा कि युवी पीढ़ी को अगर सही दिशा में ले जा सकती है, तो वह है कथा। कथा श्रवण करने से भक्त के हृदय का भाव विशेष मन से अलंकृत कर देते है। आप शराब का सेवन करें न करें छोड़े न छोड़े, इससे नुकसान किसका होता है, पीने वाले का, या नहीं पीने वाले का। आप कथा का रसपान करें, प्रभु की भक्ति का रसपान करें आपका जीवन बदल जाएगा। अगर आपको कुछ छोडऩा है तो ईष्र्या, द्वेष, निंदा करना छोड़ दें, जीवन में आनंद मिलेगा। श्री बापू ने तराजू का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि तराजू सबको तोलती है, पर कोई कभी तराजू को नहीं तोल पाया है, कमोवेश साधु-संत भी तराजू के समान है, जिन्हें कोई नहीं तोल पाया।
अमृत तो कथा में है: श्री बापू ने कथा को आगे बढ़ाते हुए कहा कि अमृत समुद्ध मंथन से निकला हो सकता है, समुद्ध तो खारा होता है, मेरा विचार है कि अमृत कथा में है, धरती पर है, स्वर्ग में नहीं है। उन्होंने कहा कि अमृत तो कथा में है, बाकी सब छलावा है।


मेरी भी पीओ: संत श्री बापू ने कहा कि पीने-छोडऩे की बात बहुत होती है, आप मेरी पीओ, यानि कथा का रसपान करो वो छूट जाएगी। एक साल में मुझे नौ दिन दो, मेरी व्यास पीठ आपको नवजीवन देगी।
जयकारे मेरे मत लगाओ: उन्होंने कथा के दौरान कहा कि मैं हल्ला-गुल्ला वाला आदमी नहीं हूं, लोग बापू के जयकारे लगाते हैं, मैं मना करता हूं, क्योंकि मुझे यह सब पसंद नहीं है। जयकारे लगाना है तो भगवान शिव के लगाओ। मुझे श्री और जी कहकर संबोधित करना अच्छा नहीं लगता है। मैं यह भी पसंद नहीं करता, मुझे बापू कहो इतना ही पर्याप्त है।

तुम अगर भूल भी जाओ: संत श्री बापू ने कथा के दौरान ‘आई लव यू’ पर विस्तार से चर्चा करते हुए एक गीत की इन पक्तियों को सुनाते हुए कहा ‘तुम अगर भूल भी जाओ, तुम्हारा ये हक है, मेरी बात और है, मैंने तो मोहब्बत की है। उन्होंने कहा कि चरणों में प्यार करना विशुद्ध भक्ति है, मैं शब्द में अहंकार होता है, इसलिए मैं कहता हूं कि ‘आई लव यू’ से आई शब्द हटाओ, बहुत प्यार मिलेगा। मैं नहीं तुम कहो प्यार सार्थक हो जाएगा। ्रमानस में महादेव की तीन धाराएं हैं: संत श्री बापू ने श्रीराम कथा में कहा कि महेश का पर्याय शत्रु महादेव है। देव और ईश में फर्क बताते हुए उन्होंने कहा कि ईश का मतलब आखरी सत्ता से है और देव का मतलब देवयोनी से है। 36 हजार देवी-देवता है, जिसमें शिव सबसे महान है। मानस में महादेव की तीन धाराएं हैं, शिवशंकर और शंभू यानि त्रिनेत्र। शिव ही परमसत्ता का परिचायक है। दैविक व अध्यात्मिक कथाओं में महेश, शिव निराकार है।


सत्यम्-शिवम-सुन्दरम्: संत श्री बापू ने ‘सत्यम्-शिवम-सुन्दरम्’ गीत सुनाया तब श्रीराम कथा का श्रवण कर रहे हजारों लोग नृत्य कर झूम उठे। कथा में हर रोज श्रोताओं की भीड़ बढ़ रही है।

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